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Justice For Mahesh Kumar Verma

Tuesday, February 26, 2013

मुझे छोड़ के कहाँ तुम चली गयी?

मुझे छोड़ के कहाँ तुम चली गयी?


मुझे छोड़ के कहाँ तुम चली गयी 

न कोई पत्र न कोई मेसेज
न कोई संवाद न कोई फोन
छोड़ के क्यों तुम चली गयी
मुझे छोड़ के कहाँ तुम चली गयी

कब तक लेगी तुम मेरे प्यार की परीक्षा
आखिर क्या है तुम्हारी इच्छा
जाना ही था तो प्रेम पूर्वक कह देती
पर इतना कष्ट तुम मुझे न देती

अब कैसे रह पाऊंगा मैं
कैसे जी पाऊंगा मैं
तेरे इंतजार में हूँ मैं उस दिन से भूखा
जिस दिन से मुझे छोड़ के तुम चली गयी
मुझे छोड़ के कहाँ तुम चली गयी

तेरे कारण ही था मैं जिंदा
अब कैसे मैं रह पाऊंगा
अब कैसे मैं जी पाऊंगा
फिर भी है मुझे यह आस
कि आयेगी तुम जरुर मेरे पास
है मुझे यह विश्वास
कि आयेगी तुम जरुर मेरे पास

भूखे कष्ट में तुमसे यही सवाल करता हूँ
कि मुझे छोड़ के कहाँ तुम चली गयी
मुझे छोड़ के कहाँ तुम चली गयी


रचयिता -- महेश कुमार वर्मा
दिनांक - 26.02.2013

2 comments:

Udan Tashtari said...

क्या बात है महेश भाई!!

Anonymous said...

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