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Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015
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Sunday, September 9, 2012

मेरा कष्ट बढ़ाकर क्यों होते हो आनंद

 मेरा कष्ट बढ़ाकर क्यों होते हो आनंद


मेरा कष्ट बढ़ाकर तुमको आता है आनंद 
मुझे छटपटाता देखकर तेरा पुलकित होता मन 
दिल तड़पाकर क्या चाहते हो 
दिल दुखाकर क्या चाहते हो  
मुझको रुलाकर क्या चाहते हो 
क्या चाहते हो 
क्या चाहते हो 
खुलके बोलो स्पष्ट बोलो 
चुप क्यों हो मुँह तो खोलो 
क्या चाहिए कह भी दो ना 
जो भी चाहिए स्पष्ट बोलो 
मेरा कष्ट बढ़ाकर क्यों होते हो आनंद 
मेरा कष्ट बढ़ाकर क्यों होते हो आनंद 


-- महेश कुमार वर्मा 

Friday, December 5, 2008

शहीदों को श्रद्धांजलि

क्या फायदा हुआ तुम्हें

किसी का घर सुना करके

किसी के मांग का सिंदूर उतार के

किसी को अनाथ करके

किसी को यों ही तड़पा के

किसी को बेमौत मार के

क्या फायदा हुआ तुम्हें

सबों को दर्द देके

है तुम्हारे पास कोई जवाब

नहीं है

क्योंकि तुम ख़ुद बेदर्द हो

क्या जानोगे दुसरे के दर्द

पर याद रखना

परमात्मा के दरबार में

तुम्हें तुम्हारे हर कर्म का जवाब देना होगा

हर कर्म का जवाब देना होगा

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शहीदों को श्रद्धांजलि

-- महेश कुमार वर्मा

Sunday, November 11, 2007

इतना कष्ट दिया तुने

इतना कष्ट दिया तुने कि अब तड़पा भी नहीं जाता है
इतना रुलाया तुने कि अब रोया भी नहीं जाता है
इतना प्यार था तुमसे कि अब साथ छोड़ा भी नहीं जाता है
इतना अन्याय किया तुने कि अब साथ रहा भी नहीं जाता है

तुझे लोगों ने श्रेष्ठ व बुद्धिजीवी समझा
पर तुम सबसे बड़ा पापी व अधर्मी निकला
तुझे लोगों ने दिल का साफ समझा
पर तुम मीठा जहर निकला
तुमसे लोगों न चाहा था उचित व्यवहार
पर तुमने किया सबों के साथ दुर्व्यवहार

तुमपर मैं किया था बहुत ही विश्वास
पर कभी न सोचा था कि तुम करोगे ऐसा आघात
पर अब मुझे नहीं होगी यह बर्दाश्त
क्योंकि तुने किया बहुत ही घिनौना वारदात

एक शंकर था आदि काल में जिसने विष का पान किया
एक शंकर तुम हो जिसने सबका सर्वनाश किया
इतना अन्याय किया तुने कि अब साथ रहा भी नही जाता है
इतना प्यार था तुमसे कि अब साथ छोड़ा भी नहीं जाता है

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यह रचना महेश कुमार वर्मा द्वारा १९.०८.२००६ को लिखा गया था।
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