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Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015

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Saturday, April 25, 2009

विकलांग पुलिस प्रशासन ने अपराधियों के समक्ष घुटने टेके व पीड़ित को खुद मामला सलटाने को कहा

हमारी पुलिस प्रशासन का हालात कैसी है इसका अंदाजा इसी घटना से लगाया जा सकता है कि आगामी ३०.०४.२००९ को लोकसभा चुनाव है और इससे मात्र ८ दिन पहले २२.०४.२००९ को एक प्रा. वि. के हेडमास्टर श्री चितरंजन भगत का अपहरण होता है। पर घटना के चौथे दिन आज २५.०४.२००९ के अब तक भी पुलिस द्वारा न तो अपहर्ता के विरुद्ध कोई खाश कार्रवाई ही की गयी है न तो अपहृत को ही उनके चंगुल से मुक्त कराया गया है जबकि अपहर्ता व अपहृत से मोबाईल पर बराबर बात हो रही है। इसके बावजूद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरक्षी अधीक्षक (एस. पी.) ने स्पष्ट रूप से कल २४.०४.२००९ को पीड़ित वालों को कह दिया कि मेरे पास कार्रवाई करने के लिए फोर्स नहीं है। वहीं डी. एस. पी. ने कह दिया कि आपलोग खुद अपने स्तर से मामला को सलटा लें। उल्लेखनीय है कि अपहर्ता द्वारा मोबाईल पर ६ लाख रूपये फिरौती की माँग की गयी है (जो बाद में कम कर ४ लाख कर दिया गया है) और पैसे जमा करने के लिए आज २५.०४.२००९ तक का समय दिया गया है अन्यथा अपहृत को जान से मार डालने की धमकी दी गयी है। पर पुलिस अब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी है। एस. पी. के अनुसार कार्रवाई करने के लिए उनके पास फोर्स नहीं है। जब इस मामला में कार्रवाई करने के लिए प्रशासन के पास फोर्स नहीं है तो आप सोच सकते है कि ५ दिनों के बाद ३०.०४.२००९ को होने वाले चुनाव कितना निष्पक्ष होगा? ............ आख़िर पुलिसवाले करेंगे भी क्या? इस घटना में पुलिसवाले व थाना का अपराधकर्मी से साथ-गाँठ है, इसका भी प्रमाण मिला है, जो इस घटना से स्पष्ट है :

अपहर्ता व अपहृत का फोन हमेशा पीड़ित के एक नजदीकी के मोबाईल पर आता है जिसमें अपहर्ता पैसे की माँग करते हैं अन्यथा अपहृत को जान से मार डालने की धमकी देते हैं। ..... मोबाईल धारक द्वारा हुए बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली जाती है और फिर वे इस रिकार्डिंग को संबंधित सलखुआ(सहरसा) थाना के पुलिस अधिकारी को सुनाते हैं। तो फिर बाद में अपराधकर्मियों द्वारा फोन पर कहा जाता है कि आप थाना गए थे और वहाँ हमलोगों के बातचीत के रिकॉर्डिंग सुनाये हैं ........... इस प्रकार कहकर उन्हें धमकी दी जाती है ........................ अब आप खुद सोचें कि थाना में रिकॉर्डिंग सुनाया गया तो यह ख़बर अपराधकर्मियों तक कैसे पहुँचा? यह इसी बात को प्रमाणित करता है कि थाना और पुलिसवाले का अपराधकर्मी से साथ-गाँठ है और इसी कारण ही वे कोई विशेष कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और इस केस से अपना पिंड छुड़ाने के लिए कह दिए कि कार्रवाई करने के लिए फोर्स नहीं है, आप अपने स्तर से ही मामला को सलटा लें (यानि पैसे के लेन-देन करके छुड़वा लें)।

इस पुरे घटनाक्रम से हमारी पुलिसिया तंत्र की हालात स्पष्ट होती है जो यदि चाहे तो अपहृत को तुरत मुक्त करा सकता है पर अपराधी से खुद उनकी साथ-गाँठ होने के कारण वे कुछ नहीं कर रही है। घटना बिहार राज्य के सहरसा जिला के सलखुआ थाना क्षेत्र की है। अपहृत श्री चितरंजन भगत सहरसा के संतनगर मुहल्ला के निवासी हैं तथा सलखुआ(सहरसा) के फरकिया क्षेत्र स्थित प्रा. वि., रंगनिया(अलानी) में हेडमास्टर के पद पर पदस्थापित हैं; जिन्हें गत बुधवार यानि २२.०४.२००९ को स्कूल जाने के क्रम में पंचभीरा घाट के समीप सशस्त्र अपराधकर्मियों द्वारा अपहरण कर लिया गया। ...................... इस क्षेत्र में यानी सुपौल लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र में अगले कुछ दिनों बाद ३०.०४.२००९ को लोक सभा चुनाव होनी है। अब आप खुद सोचें कि क्या पुलिस प्रशासन की यह हालात यहाँ लोक सभा चुनाव कराने के लिए उचित है? ............. क्या इस हालात में यहाँ निष्पक्ष चुनाव हो सकता है? ................. क्या यहाँ के आम जनता सुरक्षित है? ......................... नहीं, यहाँ न तो आम जनता ही सुरक्षित है और न ही यहाँ के पुलिस प्रशासन ही चुस्त व दुरुस्त है जो सही ढंग से चुनाव करा सके। इस प्रकार यहाँ के यानी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र सुपौल की वर्तमान स्थिति चुनाव कराने लायक नहीं है। .......... यों भी जब एक अपहरण के मामला में पुलिस कुछ नहीं कर रही है और एस. पी. खुद कह दिए कि कार्रवाई करने के लिए उनके पास फोर्स नहीं है तो फिर ऐसे विकलांग पुलिस प्रशासन के भरोसे लोक सभा चुनाव कैसे कराया जा सकता है? .....................................

(घटना की जानकारी विभिन्न स्रोतों द्वारा प्राप्त जानकारी पर आधारित)

http://popularindia.blogspot.com/

Tuesday, April 21, 2009

पाप की विदाई

आओ साथ मिलकर लड़ें अपनी लड़ाई
दुनियाँ से पाप और अत्याचार को दें हमेशा के लिए विदाई
फिर कभी न आए ये पाप हम इंसानों के बीच
नहीं बनें हम हैवान इंसानों के बीच
हम हैं इंसान
नहीं बनेंगे हैवान
आएगी पाप यदि मेरे बीच
तो दिखा दूंगा उन्हें सबसे नीच
आओ साथ मिलकर लड़ें अपनी लड़ाई
और हमेशा के लिए करें पाप की विदाई

-- महेश कुमार वर्मा
२१.०४.२००९


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Webpage : http://popularindia.blogspot.com
E-mail ID : vermamahesh7@gmail.com
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Sunday, April 19, 2009

न्याय व अन्याय


वो क्या देगा न्याय

जो न जानता है कि

क्या होता है न्याय

वो क्या देगा न्याय

जो जीवन भर किया अन्याय

न्याय और अन्याय के बीच मरती है भोली जनता

वो क्या जानेगा इसका दर्द

जो है खुद बेदर्द
जो है खुद बेदर्द

-- महेश कुमार वर्मा

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http://paramjitbali-ps2b.blogspot.com/2009/04/blog-post.html

Monday, April 6, 2009

गलती

मुझे नहीं मालूम कि मेरी क्या गलती है
मुझे तो बस इतना मालूम
कि गलती मेरी साथ हुयी
न्याय पाने की थी आशा
पर न्याय पाना भी दुस्वार हुआ
गलती बताने वाले कोई नहीं
पर सजा देने वाले हजार हुए
मेरा सुनने वाला कोई नही
पर आरोप लगाने वाले हजार हुए
घाव पर मलहम लगाने वाला कोई नहीं
पर नमक छिडकने वाले हजार हुए
साथ देने वाला कोई नहीं
पर आगे बढ़ाकर धक्का दे गिराने वाले हजार हुए
मौत से बचाने वाला कोई नहीं
पर मौत देने वाले हजार हुए
चाहते है वे मेरी मौत
तो ठीक है मुझे मौत के गले लगा दो
पर एक गुजारिश है तुमसे
कि ऐसा न करना अब किसी से
न होना कभी तुम धर्म भ्रष्ट
न देना किसी को ऐसा कष्ट
न देना किसी को ऐसा कष्ट
मुझे नहीं मालूम कि मेरी क्या गलती है
मुझे तो बस इतना मालूम
कि गलती मेरी साथ हुयी

गलती मेरी साथ हुयी
-- महेश कुमार वर्मा

Wednesday, April 1, 2009

नशा!

नशा!
नशा शराब में नहीं
नशा बोतल में नहीं
नशा तो मेरे मन में है
यदि होती शराब में नशा
तो नाचती वो बोतल
यदि होती बोतल में नशा
तो नाचती वो बोतल
पर नशा तो मेरे उस मन में है
जिसने खुद को पागल बनाया
व बोतल व शराब से दोस्ती निभाया
नशा शराब में नहीं
नशा मेरे मन में है
नशा मेरे मन में है
और बोतल बेचारा बदनाम है
नशा बोतल में नहीं
नशा मेरे मन में है
नशा मेरे मन में है

यहाँ आप हिन्दी में लिख सकते हैं :