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Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015
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Thursday, August 2, 2012

वाहन का 99% Insurance Claim फर्जी


वाहन का 99% Insurance Claim फर्जी

कुछ दिन मुझे New India Automobiles, Khajpura, Baily Road, Patna में कार्य करने का अवसर मिला है.  यह 4-wheeler का service centre (workshop) है.  यहाँ मैं जो देखा उसमें पाया कि वाहन का अधिकांश Insurance Claim फर्जी ही रहता है.  मैं जैसा देखा उस अनुसार मैं समझता हूँ कि हरेक जगह ऐसी ही स्थिति होगी और मेरे अंदाज से इस तरह का फर्जी Insurance Claim 99% या इससे भी अधिक रहती होगी.  कैसे?  इसे समझने के लिए इस बात पर ध्यान दें कि कोई भी 4-wheeler servicing के लिए workshop में आता है तो उसमें जैसी खराबी रहती है या जो भी parts टूटा या damage रहता है तो उसमें देखा जाता है कि इसमें से Insurance Claim से किस parts का पैसा मिल जाएगा.  तब फिर उसी अनुसार घटना की एक काल्पनिक कहानी बनाकर Insurance Claim किया जाता है.  जैसे - यदि गाड़ी का पिछला बम्फर थोड़ा damage है और party उसे change करवाना चाहता है तो Insurance Company के पास claim किया जाता है और घटना का विवरण दिया जाता है कि गाड़ी चल रही थी अचानक आगे कुत्ता आ गया तो break लगाया तब पीछे से दूसरा गाड़ी मार दिया जिससे बम्फर टूट गया.  .............  इस प्रकार के claim में यदि वास्तव में बम्फर टूटा हुआ नहीं है तो जानबुझकर workshop में उसे तोड़ा जाता है तब claim दिया जाता है ताकि Insurance Company वाला आकर फोटो खींचे तो फोटो में टूटा हुआ दिखाई पड़े.  ................  तो अधिकांश claim इसी तरह का फर्जी ही रहता है और लोग Insurance Company को ठगकर उससे पैसा ले लेते हैं.  इस तरह के claim में घटना की तिथि भी गलत ही दी जाती है.  सामान्यतः जिस दिन claim किया जाता है उसी दिन या एक दिन पहले का घटना दिखाया जाता है.  ...................  जैसा कि मैं बताया आप यह समझ ही गये होंगे कि वास्तव में घटना घटती नहीं है बल्कि झूठी काल्पनिक कहानी के आधार पर ही claim किया जाता है.  और यदि आप बताए गए स्थान पर या Police / Traffic Police के पास जाँच करेंगे तो इस प्रकार का कोई घटना की जानकारी नहीं मिलेगी.  ..............  इस प्रकार झूठा claim करके लोग Insurance Company को हजारों रुपये का नुकसान पहूँचाते हैं व Insurance Company spot (घटना स्थल) पर जाँच किए बगैर ही claim का पैसा भी दे देती है.  हद तो तब हो जाती है जब Insurance Company वैसी claim को भी पास कर देती है जिसपर संबंधित व्यक्ति के हस्ताक्षर में अंतर रहता है या कोई अन्य व्यक्ति ही उनके स्थान पर हस्ताक्षर कर देता है.  ........ ऐसा ही एक उदाहरण है – October 2011 में New India Automobiles, Khazpura, Baily Road, Patna के मार्फत Sanjay Kumar, Kankarbagh, Patna द्वारा Future Generaly नामक Insurance Company से लिया गया claim का पैसा .............. इसमें claim में Sanjay Kumar हस्ताक्षर नहीं किये हैं बल्कि उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति से हस्ताक्षर करवाकर process पूरा करवाया गया.  ...........  सोचिए गलत व्यक्ति के हस्ताक्षर से claim कैसे पास हो गया? ..............
इस प्रकार गलत कहानी के आधार पर फर्जी claim देकर लोग Insurance Company से पैसा ले लेते हैं.  और कभी-कभी वास्तविक claim को भी Insurance Company पास नहीं करती है.  इसी प्रकार का एक उदाहरण है – एक व्यक्ति का गाड़ी खड्ड में गिर गया जिससे उसके गाड़ी का बायाँ भाग damage हुआ ....... वह संबंधित Insurance Company में Insurance Claim किया.  ..............  Insurance Company के व्यक्ति सर्वे करने आए पर यह कहकर claim पास नहीं किया गया कि बायाँ भाग damage का claim पास नहीं होगा.  ........  अब आप खुद सोचें कि यह कैसी बिडम्बना है कि वास्तव में उसके साथ accident हुआ है और गाड़ी damage हुआ है तो उसका claim पास नहीं हुआ और जब लोग झूठी कहानी बनाकर या जानबुझकर गाड़ी damage करके झूठी कहानी बनाकर claim करते हैं तो उसका claim पास हो जाता है व उसे claim का पैसा भी मिल जाता है.  .................
सोचिए कि क्या इस प्रकार की स्थिति में हमारा देश तरक्की कर पाएगा?  ....................

-- महेश कुमार वर्मा

Sunday, July 15, 2012

परीक्षा केन्द्र पर गये बिना परीक्षा पास करें


परीक्षा केन्द्र पर गये बिना परीक्षा पास करें

यह सभी जानते हैं कि परीक्षा में कदाचार से विद्यार्थी के शिक्षा का सही आकलन नहीं हो पाता है.  और कदाचार के द्वारा परीक्षा पास कर उच्चतर वर्ग में नामांकन लेने के बाद फिर विद्यार्थी किस प्रकार क्या सीख पाएगा यह आप समझ ही रहे हैं.  वे कभी भी अपने विषय का सही ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकेंगे. पर इतना समझने के बावजूद भी विद्यार्थी व उनके अभिभावक किसी भी तरह से कदाचार से परीक्षा पास करना ही अपना लक्ष्य बना लेते हैं.  और इस कार्य में अभिभावक की अलावा स्कूल, कॉलेज, इंस्टीच्यूट के परीक्षा संचालन के स्टॉफ सहित केन्द्राधीक्षक की भी अहम भूमिका रहती है.  और वे तो अब कदाचार के सीमा को इतना तक पार कर गये हैं कि इसके बाद तो परीक्षा शब्द का मतलब ही नहीं रह जाता है.  ...........  परीक्षा केन्द्र पर गये बिना परीक्षा पास होना, प्रश्न का उत्तर लिखे बिना परीक्षा पास होना .............. ये सब इन्हीं कदाचार के उदाहरण हैं.  ..................  जी हाँ, इस तरह के कदाचार भी जोर-शोर से चल रहा है व संबंधित पदाधिकारी का पॉकेट भी अच्ची तरह से गरम हो रहा है.  और इस तरह की घटनाएँ छोटे परीक्षाओं से लेकर अच्छे-अच्छे विश्वविद्यालय के परीक्षाओं में भी हो रही है.  ................  ऐसा ही एक घटना मैं आपको सुनाना चाहता हूँ जो परीक्षा के इस कदाचार को भी प्रमाणित करती है व कदाचार में सेंटर के डायरेक्टर का साथ नहीं देने पर किस प्रकार वे एक ईमानदार स्टॉफ को कार्य पर नहीं रखते हैं, यह भी स्पष्ट होता है.  तो सुनें वह घटना जो मेरे ही साथ घटी है -
27 जनवरी 2012 की बात है – मेरी मुलाकात मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय (Maulana Mazharul Haque Arbic and Persian University) के अंतर्गत चलने वाले Patliputra Institute of Technology and Management, Patliputra Colony, Patna डायरेक्टर Prof. V. K. Singh (Mob. No.: 9386803802) से हुयी.  मुझसे मिलने के बाद वे मुझसे प्रभावित हुये.  वे मुझे अपने यहाँ कार्य पर रखना चाहे.  मैं भी अच्छा कार्य ढूँढ ही रहा था.  ............  वे मुझसे बातचीत कर मेरा Resume विचारार्थ रख लिए.  कुछ दिनों के बाद वे मुझे बुलाये व Computer पर कार्य करवाकर मेरा Interview लिए व फिर मेरा सारा Certificates का Xerox Copy व एक फोटो जमा करवा लिए.  ......................
इसके बाद वे मुझे रोज बुलाने लगे तथा मेरा कागजात University भेज दिए हैं ............... आज order होगा ............. कल order होगा .......... Registrar अभी बाहर गये हुए हैं, वे आएँगे तब order हो जाएगा ............... आपका selection बेगुसराय सेंटर के लिए confirm है ................. 1 मार्च को joining करना है .............. Registrar बीमार पड़ गए हैं ............. – इस प्रकार की बात वे करने लगे पर वे मुझे रोज आकर मिल लेने के लिए कहते थे.
इसी तरह की बातें कई दिनों तक होती रही.  इसी बीच 17.02.2012 से उस centre पर यानी Patliputra Institute of Technology and Management पर B. Com. की परीक्षा प्रारंभ होने वाली थी.  इस परीक्षा के लिए Director V. K. Singh मुझे एक परीक्षार्थी का परीक्षा का copy लिखने के लिए कहे.  मुझे copy मिलता और मैं उसे अपने घर पर ले जाकर लिखता ............ इस कार्य के लिये वे मुझे पैसे का प्रलोभन भी दिए.  उसी तरह मैं यहाँ भी इस कार्य से इंकार नहीं किया जिस प्रकार मैं RSBY के कार्य में इंकार नहीं किया था. .................  17 तारीख आने पर University के Programme के अनुसार परीक्षा प्रारंभ हो गयी पर उस परीक्षार्थी का copy नहीं लिखा गया.  एक दिन Director V. K. Singh पुनः कह रहे थे कि copy रखा हुआ है, कहो तो दे देते हैं लिख दो ........... पर वे सिर्फ अपना फायदा ही देख रहे थे, वे मुझे पहले पैसा देने के लिए तैयार नहीं हुए और मैं स्पष्ट कह दिया कि पहले payment होगा तब लिखेंगे और इस प्रकार मैं copy लिखने के लिए तैयार नहीं हुआ.  .................  इसपर वे मुझपर गुस्सा गये व बोले कि जब तुमको मुझपर विश्वास ही नहीं है तो फिर मैं क्यों तुमको रखूँगा, जाओ यहाँ से ................ पर फिर बाद में मेरा appointment का order के बारे में पता करने के लिए बोले.  ................  पर अंततः 25 या 26 फरवरी तक यह कार्य नहीं हुआ.  फिर आगे मैं पुछना भी छोड़ दिया.  इसके बाद मैं न तो उनसे मिला न तो फोन ही किया.  .......................
इस घटना से क्या निष्कर्ष निकलता है, आप खुद समझ सकते हैं.  ..................... यह तो स्पष्ट ही है कि मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय के Patliputra Institute of Technology and Management, Patliputra, Patna में परीक्षार्थी को centre पर गए बिना भी परीक्षार्थी का copy लिखा जाता है व परीक्षा के दिन बित जाने की बाद भी copy लिखा जाता है. ............................
अब आप सोच सकते हैं कि जहाँ नितिश सरकार के कार्यकाल में विकास की चर्चा है वहाँ वास्तव में यह राज्य विकास की ओर है या शिक्षा-जगत में इस प्रकार के कदाचार से पतन की ओर है?  ........................  और आप सोचें कि शिक्षा-जगत में इस प्रकार के कदाचार से क्या बिहार या हमारा देश कभी विकास कर पाएगा?

-- महेश कुमार वर्मा


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Saturday, January 24, 2009

गणतंत्र दिवस : एक प्रश्न

दो दिनों के बाद २६ जनवरी २००९ को हम गणतंत्र दिवस के ५९ वीं वर्षगाँठ मनाएँगे। प्रश्न उठता है की हम गणतंत्र दिवस क्यों मनाएँ? क्या सिर्फ इसलिए कि हम भारतीय है? जरा सोचें कि हमारे देश भारत वर्ष को स्वतंत्र हुए आज ६१ वर्ष वर्ष व गणतंत्र हुए ५९ वर्ष बीत गए पर आज तक देशवासियों को वास्तविक स्वतंत्रता व उचित अधिकार नहीं मिली है?

कानून के पुस्तकों में व कागजी घोषणाओं में तो देशवासियों को सारी सुविधाएँ, वास्तविक स्वतंत्रता व उचित अधिकार मिल गयी है। पर वास्तविकता इनसे कोसों दूर है। वास्तविकता के जमीं पर हम आयें तो हम देखेंगे कि आज देशवासी ख़ुद अपने ही देश में गुलामी की स्थिति में जी रहे हैं। इन्हें न तो वास्तविक स्वतंत्रता मिली है न तो उचित अधिकार मिला है और न तो जरुरत पड़ने पर इनके साथ उचित न्याय ही होता है।

यह बात सिर्फ कहने-सुनने के लिए ही नहीं बल्कि वास्तविकता है। आप ख़ुद देखें आज बच्चों को उचित शिक्ष भी नहीं मिल पाती है। उन्हें पढने व खेलने का भी अधिकार नहीं है और बचपन से ही उनसे मजदूरी करायी जाती है। ....... आज महिलाओं को अपने अधिकार के लिए लड़ने का भी अधिकार नहीं है और महिला वर्ग हमेशा पुरुषों द्वारा प्रताडित ही होती रहती है। आज पीड़ित को उचित न्याय नहीं मिल पाता है और तंग आकर वह अपराधी भी बन जा रहा है। आज भारत में न्यायप्रिय राजा नहीं है बल्कि यहाँ सभी मुद्राप्रिय हैं। कभी दुनियाँ को धर्म की शिक्षा देने वाला भारत आज खुद भ्रष्टाचार, बेईमानी व तरह-तरह के जुल्म के खाई में गिरा हुआ है। और इसके लिए जिम्मेवार और कोई नहीं बल्कि हमारे न्यायपालिका व कार्यपालिका के साथ-साथ खुद हमारे समाज हैं। जी हाँ, इसमें आश्चर्य करने की कोई बात नहीं है। आज हमारे न्यायपालिका व कार्यपालिका की व्यवस्था ऐसी है कि आज अन्याय व जुल्म के सताए व्यक्ति को उचित न्याय भी नहीं मिल पाता है। पुलिस से लेकर अदालत तक सभी मुद्राप्रिय हो गए हैं और यहाँ धर्म के आधार पर नहीं बल्कि मुद्रा के आधार पर न्याय होता है। ऐसे कई मामला देखे जाते हैं जहाँ न्यायलय में न्याय करने के लिए बैठे हमारे न्यायाधिश भी पैसे लेकर पैसे वाले के पक्ष में फैसला सुनाते हैं। अपराध बढ़ाने में तो शायद सबसे बड़ा हाथ समाज से अपराध को मुक्त कराने के लिए बैठे हमारे पुलिसिया तंत्र का ही है। जहाँ यदि आप अपने ऊपर हुए किसी जुल्म व अन्याय के शिकायत करने जाएँ तो आपके साथ क्या जुल्म हुआ यह नहीं देखा जाता है बल्कि देखा जाता है कि आपके पास क्या पैसा है। इतना ही नहीं, अपराधी अपना लाभांश इन पुलिस को देकर ही अपने अपराध के व्यवसाय में दिन दुनी रात चौगुनी प्रगति कर रहे हैं। ................. अपराधों को बढ़ाने में हमारा समाज भी पीछे नहीं है। भ्रूण-हत्या हो या बच्चों व कन्या को शिक्षा से वंचित करना व बाल मजदूरी का अपराध हो या महिलाओं को प्रताड़ित करने का मामला हो या दहेज़ समस्या हो, इन सब अपराधों की जड़ हमारा समाज ही है और इसमें कोई दो राय नहीं की इसी समाज में ये अपराध पल व बढ़ रहे हैं। .........................

इन सारे जुल्म व शोषण के शिकार होते हैं एक भोले-भाले आम नागरिक जिनके पास न्याय पाने के लिए कोई रास्ता नहीं रह जाता है और वे शारीरिक व मानसिक कष्ट में अपने जीवन बर्बाद करते रहते हैं। आप खुद सोचें कि हमारे देश में इतनी समस्याएँ व अराजकता रहने के बाद हम कैसे कह सकते हैं कि हम स्वतंत्र हैं। जहाँ न्यायलय मैं भी न्याय नहीं मिलता है तो हम कैसे कह सकते है कि हमारा देश गणतंत्र है? .................... और ऐसी स्थिति में हमें गणतंत्र दिवस मनाने का क्या औचित्य रह जाता है? ........ आयें अपने समाज व देश से अन्याय, भ्रष्टाचार व जुल्म को उखाड़ फेकने के लिए कदम आगे बढाकर राष्ट्रहित में कार्य करें।

धन्यवाद।

आपका

महेश कुमार वर्मा

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कन्या भ्रूण हत्या : एक घिनौना कार्य

भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध

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महापाप

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स्त्री शिक्षा में बाधा क्यों

बाल शिक्षा बनाम बाल मजदूरी

मुर्ख मनुष्य

बकरे की जुबान

Saturday, July 26, 2008

महापाप

इसमें कोई दो राय नहीं कि कन्या भ्रूण हत्या बढ़ने का सर्वाधिक मुख्य कारण संतान के रूप में लड़की की चाह न होकर लड़का की चाह होना रहता है।



अतः जबतक समाज की मानसिकता को बदलकर नर व नारी एक सामान की भावना नहीं लाई जाएगी तबतक इस समस्या से निजात पाना मुश्किल है। और इसके लिए समाज को ही सोचना पड़ेगा व आगे आना पड़ेगा।



फिर आख़िर संतान के रूप में लोग लड़की क्यों नहीं चाहते हैं? हमें इस पर भी सोचना चाहिए और इसमें जो कारण उचित हों उसे दूर करने का उपाय समाज को ही करना होगा। ऐसे ही कारणों में से एक कारण है : दहेज-समस्या।



हमारी समाज दहेज रूपी दानव को नष्ट करने का कोई पहल नहीं करती है, पर जन्म से पूर्व अपने ही संतान को नष्ट करने का पहल जरुर करती है। सोचिए आख़िर कितनी संकीर्ण व नीच विचारधारा की है हमारी समाज। ......... और यदि हमारी समाज इतनी नीच विचारधारा की है तो हमें समाज के इस विचारधारा का विरोध करने में संकोच नहीं करना चाहिए।


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फिर कन्या भ्रूण हत्या ही क्यों , नर या मादा किसी भी प्रकार की भ्रूण हत्या महापाप है। उस माँ-बाप के लिए अपने संतान के प्रति इससे बड़ा कुकर्म और क्या होगा, जिसने ख़ुद संतान के जन्म के लिए प्रयोजन किया व फिर जन्म से पहले ही अपने ही संतान को नष्ट कर दिया।


कन्या भ्रूण हत्या ही नहीं किसी भी लिंग की भ्रूण हत्या महापाप है।


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कन्या भ्रूण हत्या : एक घिनौना कार्य

मुझे भी जन्म लेने दो

Tuesday, July 22, 2008

मुझे भी जन्म लेने दो

तुम मुझे क्यों मारना चाहते हो
मैं बेटी बनकर जन्म ले रही हूँ इसीलिए
मेरे बेटी होना से तुम क्यों घबराते हो
दहेज़ के कारण
या बेटी को पराया धन समझते हो
पर तुम्हारा सोचना व्यर्थ है
बेटी पराया धन नहीं है
तुम मुझे उचित शिक्षा देना
मेरे साथ पराये का व्यव्हार न करना
तब तुम देखोगे कि
बेटी बेटा से कहीं अधिक आगे व शुखदायक है
और तब दहेज़ की समस्या भी ख़त्म हो जाएगी
क्या सोचते हो
मेरे जन्म से तुम्हें मोक्ष या परमात्मा-प्राप्ति में संदेह है
पर तुम्हें यह समझाना चाहिए कि
मोक्ष या परमात्मा-प्राप्ति
संतान के बेटा या बेटी होने पर निर्भर नहीं करता है
यह निर्भर करता है तुम्हारे ध्यान-साधना व तुम्हारे किए कर्म पर
फिर क्या मुझे जन्म से पहले ही मार देने पर
तुम्हें मोक्ष या परमात्मा की प्राप्ति हो जाएगी
कभी नहीं, कभी नही, कभी नहीं
तब फिर तुम मुझे क्यों मारना चाहते हो
तुम्हारी सारी सोच निराधार है
तुमने ही मुझे जन्म लेने के लिए प्रयोजन किया
फिर तुम ही मुझे जन्म से पहले ही मारने का प्रयोजन कर रहे हो
सिर्फ इसीलिए कि मैं नारी जाति का हूँ
पर तुम यह मत भूलो कि
मैं जिसके कोख से जन्म लेने वाली हूँ
वह भी नारी ही है
मुझे जन्म देने वाली माँ भी नारी के कोख से ही जन्म ली है
तुम भी नारी के ही कोख से जन्म लिए हो
इतना ही नहीं
सभी नर व नारी नारी के ही कोख से जन्म लिए हैं
तब फिर तुम मुझे जन्म लेने से क्यों रोकते हो
शायद अब तुम समझ गए होगे कि
नारी बिना यह सृष्टि नहीं चल सकती है
व बेटी पराया नहीं अपना है
मेरे जन्म के प्रयोजन करने वाले मेरे माता-पिता
तुमसे मेरी यही आग्रह है कि
मुझे मारने का प्रयोजन मत करो
व मुझे मत मारो
मुझे भी जन्म लेने दो
मुझे भी जन्म लेने दो


रचनाकार : महेश कुमार वर्मा
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Sunday, July 20, 2008

कन्या भ्रूण हत्या : एक घिनौना कार्य

भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध है व यह मानव जाति के लिए कलंक है। हरेक सफलता के पीछे एक नारी का हाथ होता है और जब हम उस नारी जाति के भ्रूण को जन्म से पहले ही नष्ट कर देते हैं तो इस मनुष्य के लिए इससे बड़ी कलंक की बात और क्या हो सकती है? धिक्कार है उसको जो किसी भी प्रकार से भ्रूण हत्या में लिप्त हैं........


यह कहना किसी भी अर्थ में सही नहीं है कि बेटा या पुत्र से ही उद्धार होता है। ........आज तो ऐसा कई बार देखा गया है कि पिता जिस पुत्र से आशा रखता है वही पुत्र उसके मृत्यु का कारण भी बनता है। ........... यदि हम आध्यात्म में गहरे तक जाएँ तो हम इस बात को अच्छी तरह से समझ सकते कि मोक्ष या उद्धार ईश्वर प्राप्ति संतान के नर या मादा होने पर कभी भी निर्भर नहीं करता है।जिस नारी जाति से सारी मनुष्य जाति चाहे वह नर हो या मादा का जन्म होता है, उस नारी जाति के भ्रूण को जन्म से पहले ही नष्ट कर देना या उससे घृणा करना मनुष्य के लिए एक घिनौना कार्य ही है। ................

--महेश कुमार वर्मा

दिनांक : २०।०७।२००८

स्थान : पटना

लेखक : MAHESH KUMAR VERMA

पता : DTDC Courier Office,

Satyanarayan Market,

Opposite Maruti (KARLO) Show Room,

Boring Road, Patna (Bihar)

PIN-800001 (INDIA)

E-mail ID : vermamahesh7@gmail.com

Webpges : http://popularindia.blogspot.com/

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Contact No. : +919955239846

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भ्रूण हत्या एक जघन्य अपराध

जघन्य अपराध

Sunday, January 13, 2008

विचार : दूध का सेवन कहाँ तक उचित है

आज मिठाई का चलन खूब हो गया है, कोई विशेष समारोह हो तो वहाँ नास्ता में मिठाई , मेहमान को नास्ता कराना हो तो वहाँ मिठाई ........... इत्यादि कई प्रकार से मिठाई का उपभोग हो रहा है। ............ अधिकांश मिठाई के निर्माण में दूध का ही उपयोग किया जाता है। दूध का उपयोग मिठाई बनाने के अलावा भी कई कार्यों में होता है। चाय का उपयोग तो हरेक जगह धड़ल्ले से हो रहा है जिसमें दूध का ही प्रयोग किया जाता है। ........... कुल मिलाकर कहें तो आज दूध का उपयोग लोगों के जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। ........... पर सोचें कि यह दूध हम कहाँ से लाते हैं? ............ यह दूध हम किसी न किसी स्तनधारी जीव (भारत में मुख्यतः गाय व भैंस) से लेते है, जिसे वह अपने बच्चे के लिए पैदा करती है। हम एक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी मानव होकर एक पशु के बच्चा को अपने माँ का दूध पीने से वंचित कर देते हैं और खुद उसका दूध हम पीते हैं। ........... जब हमें इन पशु से दूध प्राप्त करना होता है तो हम क्या करते हैं? ............... बच्चा को अलग बांध देते हैं फिर वह पशु जिसे दुहना रहता है उसका भी पैर बांध देते हैं और तब फिर हम दुहकर दूध प्राप्त करते हैं। और इस बीच बेचारा वह पशु का बच्चा दूध पीने के लिए छटपटाते रहता है। ..............हम बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी होकर कितना जुल्म करते हैं इन बच्चों पर जिसकी माँ ने उसे जन्म देने के बाद उसके आहार के लिए अपने थन / स्तन में दूध उत्पादित करती है उसे हम उस बच्चे को न देकर खुद पीते हैं। ............... क्या यह उचित है? ..............कभी नहीं, नैतिकता के दृष्टि से यह कभी भी उचित नहीं है कि हम सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी मानव होकर एक पशु के बच्चे पर इस प्रकार का जुल्म करके उसका आहार को हम ग्रहण करें। ............. ख्याल रखें कि कोई भी स्तनधारी जीव चाहे वह मनुष्य हो या पशु वह अपने दूध का उत्पादन सिर्फ अपने शिशु / बच्चा के लिए ही करता है न कि अन्य के लिए और यह प्रकृति का नियम है। .............. इस प्रकार हमें सिर्फ अपने ही माँ का दूध पीने का अधिकार है जो हम अपने शैश्यावस्था में पी चुके होते हैं और इसके अलावा हमें अन्य किसी भी जीव का दूध पीने का कोई अधिकार नहीं है। और इस प्रकार हमें दूध या दूध से बने किसी भी पदार्थ का उपभोग नहीं करना चाहिए क्योंकि दूध हमारे लिए नहीं बल्कि उस बच्चे के लिए होता है जिसे हम भूखे रखकर जबरन उसके माँ के थन से दूध निकालते हैं।
हमें नवजात पशु पर व उसके जननी (माँ) पर जुल्म ढाना बंद करके किसी भी प्रकार से दूध का उपयोग बंद करना चाहिए।

Saturday, November 17, 2007

मांसाहार भोजन : उचित या अनुचित

मनुष्य जाति के लिए इससे बड़ी शर्म की बात और कुछ नहीं होगी कि यह बेकसूर जीवों को मारकर फिर उसे खाकर अपना पेट भरता है। धिक्कार है ऐसी मनुष्य जाति को जो अपने को सर्वश्रेष्ठ व सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील कहता है। उस समय कहाँ जाती है उसकी बुद्धिमत्ता व विवेकशीलता जब वह बेकसूर जीवों को मारकर उसे खाता है? क्या यही उसकी बुद्धिमत्ता है कि निरपराध जीवों को मारकर अपनी पेट भरे? क्या यही उसकी बुद्धिमत्ता है कि अपने से कमजोर जीव को मारकर अपना पेट भरे?..................
किसी भी सूरत में मांसाहार भोजन उचित नहीं है। जिस प्रकार हमें अपने प्राणों से प्रेम रहता है उसी प्रकार हमें उन जीवों के लिए भी सोचना चाहिए जिन्हें मारकर हम खाते है। ..........

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मंथन : विजया दशमी और मांसाहार भोजन

शाकाहारी भोजन : शंका समाधान

वह बकरा ने आपको क्या किया था?

http://groups.google.co.in/group/hindibhasha/browse_thread/thread/dde9e2ce361496a0

Friday, October 26, 2007

अपराधी बनने का एक कारण यह भी

कोई भी व्यक्ति यों ही अपराधी नहीं बन जाता है या यों ही अपराध नहीं कर बैठता है या कोई भी व्यक्ति यों ही आत्महत्या नहीं करता है बल्कि कोई मानसिक प्रताड़ना से या कोई अन्य कारण से वह इतना टूट जाता है कि उसे अपने मामला में आगे बढ़ने के लिए कोई रास्ता नहीं रह जाता है, कोई उसका साथ देने वाला या सुनने वाला नहीं रह जाता है तो अपने ऊपर किये जा रहे अन्याय से उबकर परिस्थितिवश वह या तो अपराध कर बैठता या अपराधी बन जाता है या तो फिर आत्महत्या कर लेता है ।................
वास्तव में कितने लोगों को आज न्याय पाना तो दूर कि बात उन्हें न्याय मांगने का भी अधिकार नहीं है और यदि वह न्याय कि मांग किया तो उसके साथ और भी ज्यादा अन्याय होने लगता है । .............और उसके साथ अन्याय जब चरम-सीमा पर पहुंच जाती है, उसके साथ मानसिक प्रताड़ना इतनी अधिक हो जाती है कि ऐसी स्थिति में कभी-कभी पीड़ित विवश होकर हथियार उठा लेता है या फिर ऐसी ही स्थिति में कभी-कभी पीड़ित या तो आत्महत्या कर लेता है या फिर अपराधी बन जाता है या फिर मानसिक प्रताड़ना से जूझकर पागल हो जाता है । ................
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पाठक कृपया इस विषय पर अपना निष्पक्ष विचार दें ।
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