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Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015
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Monday, October 22, 2012

दुर्गा पूजा : जरा इधर भी ध्यान दें


दुर्गा पूजा : जरा इधर भी ध्यान दें


सबों को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं। दशहरा के पर्व को अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतिक माना गया है। इस पर्व में लोग शक्ति की देवी दुर्गा की आराधना करते हैं तथा खुशियाँ मनाते हैं व कई प्रकार से खर्च करते हैं। पर जरा सोचें हमारे समाज व परिवेश में ऐसे कितने लोग हैं जिन्हें भोजन तक की उचित व्यवस्था नहीं है और इनमें से कई ऐसे हैं जो अपने पेट भरने के लिए अपराध या कुकर्म को अपना रहे हैं। सोचें कि इस स्थिति के लिए जिम्मेवार कौन है? निःसंदेह इस स्थिति के लिए जिम्मेवार हमारी समाज, परिवेश व सरकार के भ्रष्ट नीति है। हमें इस पर सोचना चाहिए व इस स्थिति को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए।

-- महेश कुमार वर्मा 

Monday, October 3, 2011

दुर्गापूजा की शुभकामना



सबों को दुर्गापूजा की ढेर सारी शुभकामनाएं


Saturday, September 19, 2009

करें मानवता को महान

नमस्कार।

आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया है। और इसके साथ ही दशहरा व दुर्गा पूजा का पर्व का भी शुभारंभ होगया। इस खुशी के माहौल में और भी खुशी आ गयी कि दो दिनों के बाद आपसी प्रेम व भाईचारा का पवित्र पर्व ईदहै। इन खुशी व पवित्र पर्व के अवसर पर आम जनों से मेरा आग्रह है कि इन पर्वों को खुशी व पवित्रता के साथ ही मनाएं तथा इन पर्वों में बुराई को न आने दें।


पर्व है प्रेम व भाईचारा का
रखें इसे पवित्र अल्लाह के नाम
पर्व है अन्याय पर न्याय के विजय का
रखें इसे स्वच्छ भगवान के नाम
गर तुम करोगे मांसाहार
तो पर्व हो जाएगा दूषित
व हम हो जायेंगे बदनाम
अतः रोको इन कुप्रथाओं को मानवता के नाम
मत करो हिंसा अल्लाह व भगवान के नाम
पर्व है पवित्र रखो इसे पवित्र
मत करो इसे दूषित
पर्व है पवित्र
प्रेम व भाईचारा का पर्व है बड़ा महान
अन्याय पर न्याय की विजय से होती है
मानवता की पहचान
हम हैं मानव
करें मानवता को महान
करें मानवता को महान

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है रमजान प्रेम-मुहब्बत का महीना

प्रेम है बहुत महान

मंथन : विजया दशमी और मांसाहार भोजन

मांसाहार भोजन : उचित या अनुचित

शाकाहारी भोजन : शंका समाधान

वह बकरा ने आपको क्या किया था?

चमड़ा से निर्मित वस्तु का उपयोग कहाँ तक उचित है?

मुर्ख मनुष्य

बकरे की जुबान


Friday, October 19, 2007

मंथन : विजया दशमी और मांसाहार भोजन

कई स्थानों पर लोग विजया दशमी के दिन मांसाहार भोजन करते हैं, यह कहाँ तक उचित है? एक ओर हम पूरे धूम-धाम से दुर्गा-पूजा का पर्व मनाते हैं, जिसमें हम अनेक देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं और फिर दूसरी और इस पर्व के समाप्ति के दिन हम मांसाहार भोजन करते हैं, यह कहाँ तक उचित है? क्या दुर्गा पूजा व दशहरा पर्व का उद्देश्य मांसाहार भोजन है जो हम अपने इस पर्व की समाप्ति मांसाहार भोजन से करते हैं? कभी नहीं, इस पर्व का ऐसा उद्देश्य कभी नहीं है। यह पर्व हमें अन्याय से लड़ने की सिख देती है,...........तो फिर हम बेकसूर जीवों को मारकर फिर उसका भोजन करके खुद अन्याय क्यों करते हैं? ख्याल रखें की यह पर्व अन्याय से लड़ने के लिए है न कि अन्याय करने के लिए। .........


आज हम बहुत ही गर्व के साथ कहते हैं कि मनुष्य इस पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी है। पर जरा सोचें कि एक बेकसूर जीवों को मरना व कष्ट देना क्या यही हमारी बुद्धिमत्ता है? ........ जरा सोचें कि हम अपने प्राणों से या अपने बच्चों से कितना प्यार करते हैं, क्या इसी प्रकार हमें दूसरे जीवों के लिए नहीं सोचना चाहिए? जिन जीवों को हम मारकर भोजन करते हैं उनमें भी उसी प्रकार आत्मा है जैसे मुझमें व आपमें है तथा उसे भी उसी प्रकार कष्ट होता है जैसे मुझे व आपको होता है। सोचें को आपको जब थोडा कष्ट होता है तो आपको कैसा लगता है ...........? उसी प्रकार सब जीवों को कष्ट होता है? ........ सोचें कि यदि आप बेकसूर हों और आपको कोई कष्ट देगा तो आपको कैसा लगेगा? ........ उसी प्रकार उस जीव के लिए भी सोचें जिसे मारकर हम खाते हैं? ............ इस पृथ्वी पर के सबसे अधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी मनुष्य के लिए यह शर्म की बात है कि वह सिर्फ अपने पेट व जिह्वा स्वाद के लिए बेकसूर जीवों को मारकर उसका मांस का भोजन करे। .......... ऐसी स्थिति में मनुष्य सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी कहना 'बुद्धिमत्ता' व 'विवेकशीलता' शब्द का अपमान करना है। और ऐसी स्थिति में मनुष्य को सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणी न कहकर मनुष्य को पशु से भी बदतर कहना अनुचित नहीं होगा। (क्यों?)

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मांसाहार भोजन : उचित या अनुचित

शाकाहारी भोजन : शंका समाधान

वह बकरा ने आपको क्या किया था?

http://groups.google.co.in/group/hindibhasha/browse_thread/thread/dde9e2ce361496a0

Thursday, October 18, 2007

सबों को दुर्गा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ

सबों को दुर्गा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ । वर्तमान में हमलोग दुर्गा पूजा मना रहे हैं । जिधर देखें उधर दुर्गा पूजा की तैयारी है । दुर्गा पूजा में सजावट में हम कितने खर्च करते हैं व हर्सोल्लास के साथ दुर्गा पूजा का पर्व मनाते हैं । दुर्गा पूजा का पर्व पूरे १० दिनों का पर्व हैं । प्रत्येक वर्ष आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को कलश स्थापना के साथ नवरात्रारम्भ होता है तथा नौ दिनों तक विधिवत मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद दशमी के दिन प्रतिमा विसर्जन के रश्म के साथ दुर्गा पूजा का पर्व समाप्त होता है । इस दशमी के दिन को विजया दशमी भी कहते हैं । कहते हैं इसी दिन भगवान रामचंद्र ने लंकापति रावण को मारा था और इसी दिन दस सिर वाला रावण हारा था इसीलिए इस पर्व को दशहरा भी कहते हैं।
सिर्फ दुर्गा पूजा ही नहीं अन्य पर्व भी हमलोग प्रतिवर्ष नियमित रूप से मनाते हैं । सिर्फ धार्मिक पर्व ही नहीं कई घटनाओं का वर्षगांठ या साल-गिरह हम मनातें हैं तथा कई महापुरुष के जन्म-दिन के वर्षगांठ पर उन्हें याद करते हैं । स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस व गांधी-जयंती को तो भारत में राष्ट्रीय पर्व मान लिया गया है । इतना ही नहीं अन्य कई घटनाओं का हम वर्षगांठ या साल-गिरह मनाते हैं जिसमें हम उन घटनाओं को याद करते हैं । हम अपने घर-परिवार में भी अपने या बच्चे के या घर के अन्य सदस्य के जन्म के वर्षगांठ मनाते हैं।
कुल मिलाकर कई वर्षगांठ व साल गिरह पर हम काफी रकम खर्च करते हैं पर सोचनीय है कि किसी भी घटना का वर्षगांठ या साल गिरह मनाने के पीछे हमारा क्या उद्देश्य रहना चाहिए ? जिस घटना के वर्षगांठ या साल-गिरह हम मनाते हैं क्या उस घटना से मुझे वास्तविक सिख नहीं लेनी चाहिए ? इसमें कोई दो राय नहीं है कि किसी भी घटना के वर्षगांठ या साल गिरह मनाने के पीछे हमारा उद्देश्य उस घटना को याद कर उससे अच्छाई को ग्रहण करना व बुराई को त्यागना होना चाहिए । साथ ही घटनाओं को याद कर मुझे यह भी महसूस करना चाहिए कि उस घटना में कहाँ भूल हुयी और उससे हमें भविष्य के लिए सिख लेनी चाहिए । किसी भी घटना के वर्षगांठ या साल गिरह मनाने में जबतक हम उससे कुछ सिख ग्रहण नहीं करते हैं और उसे अमल में नहीं लाते हैं तबतक उस घटना का साल-गिरह मानना निरर्थक ही होगा भले ही उसके पीछे हजारों रुपये क्यों न खर्च किये गए हों । ................दुर्गा पूजा में हम पूरे नवरात्र दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं जिसमें अंततः हम यही देखते हैं कि दानवों कि हार होती है और इसके लिए देवी को उनसे लड़ना पडा था । ................
तो आयें इस दुर्गा पूजा में हम सिर्फ बाहरी सजावट में ही पैसे खर्च न करें बल्कि इस पूजा में अन्याय व बुराई के विरुद्ध लड़ने के लिए दृढ संकल्पित हों तथा अपने में जो भी बुराई हैं उसे निकाल फेकें।
आपका
महेश
चिट्ठाजगत
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