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Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015
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Sunday, October 18, 2009

हमें मनुष्य बनना होगा

दिवाली का पर्व बीत गया और अब महापर्व छठ निकट गया है। आपको याद होगा पिछले वर्ष छठ पर्व के उपरांत पशुओं ने कवि के रचना के माध्यम से मनुष्य को मुर्ख की संज्ञा देता हुए शाप दिया था कि इनका व्रत निष्फल जाएगा। क्या हम मनुष्य पशुओं के शाप से मुक्त होंगे?

हम मनुष्य को सबसे बुद्धिमान विवेकशील प्राणी कहते हैं पर वास्तव में इनका जीवन आज पशु से भी बदतर है, तभी तो ये पशुओं का दुःख-दर्द नहीं समझते हैं उन्हें मारकर अपना पेट भरते हैंकिसी भी दृष्टि से देखा जाए तो प्रकृति ने मनुष्य को मांसाहारी जीव के रूप में नहीं बनाया है पर मनुष्य प्रकृति के नियम को तोड़कर मांसाहार करता हैउस समय मनुष्य अपनी सारी बुद्धि खो देता है और पशु से भी बदतर बन जाता
है।

अतः कवि हमें जोर डालते हुए मनुष्य बनने के लिए कहता है :

हमें मनुष्य बनना होगा
पशुओं का दर्द समझना होगा
प्रकृति के साथ चलना होगा
हमें मनुष्य बनना होगा

बन सके नारायण तो
नर का कर्तव्य निभाना होगा
अंदर के बुराई को हटाना होगा
अच्छाई को लाना होगा
हमें मनुष्य बनना होगा
हमें मनुष्य बनना होगा


-- महेश कुमार वर्मा

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Wednesday, November 5, 2008

मुर्ख मनुष्य

देख मुर्ख मनुष्य को
करता है ये छठ पर्व
चाहता है हजारों कामना
छठ करने के लिए
कितनी सारी व्यवस्था करता है
भगवान से हजारों कामना चाहता है
खरना करता है
उपवास रहता है
नदी जाता है
सूर्य को अर्ध्य देता है
ताकि उसकी मनोकामना पुरी हो
पर उसका नहाय-खाय
खरना, उपवास
व सूर्य को अर्ध्य देना
सब तब हो जाता है बेकार
जब छठ के तुरत बाद
वह भूल जाता है
अपने धर्म व कर्म को
और करता है
मुझपर बेवजह प्रहार
मैं ही नहीं
मेरे जैसे हजारो
बकरे मारे जाते है
छठ के पारण दिन
लेते हैं मनुष्य
बेवजह इनकी जान
नहीं है इन्हें अपने धर्म की पहचान
नहीं है इन्हें अपने धर्म की पहचान

मुर्ख मनुष्य
करके मेरा बध
छठ के अपने पुण्य को
ख़ुद मिटा देता है
और ले आता है
अपने खाते में
सिर्फ पाप ही पाप
इसीलिए तो नहीं करता है ये
कोई तरक्की
नहीं करता है, नहीं करेगा
कभी ये कोई तरक्की
ये फल है ख़ुद कर्म की उनकी
नहीं करेगा कभी ये कोई तरक्की
नहीं करेगा कभी ये कोई तरक्की

अरे मुर्ख व पापी मनुष्य
मेरी गलती मुझे बताओ
मेरा अपराध मझे बताओ
तुमने मुझे क्यों मारा
मुझ बेगुनाहों को क्यों रुलाया
मारकर मुझे तुम
तरक्की कर सकते नहीं
शांत तुम रह सकते नहीं
चैन से तू सो सकते नहीं
चैन से तू सो सकते नहीं

कहता है तुमसे ये बकरा
अपना भविष्य तुमने ख़ुद है उकेरा
अवश्य मिलेगा तुम्हें मुझे मारने का फल
जाएगा तुम्हारा सारा व्रत निष्फल
जाएगा तुम्हारा सारा व्रत निष्फल


-- महेश कुमार वर्मा
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