इस साईट को अपने पसंद के लिपि में देखें

Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015
Showing posts with label दर्द. Show all posts
Showing posts with label दर्द. Show all posts

Friday, December 5, 2008

शहीदों को श्रद्धांजलि

क्या फायदा हुआ तुम्हें

किसी का घर सुना करके

किसी के मांग का सिंदूर उतार के

किसी को अनाथ करके

किसी को यों ही तड़पा के

किसी को बेमौत मार के

क्या फायदा हुआ तुम्हें

सबों को दर्द देके

है तुम्हारे पास कोई जवाब

नहीं है

क्योंकि तुम ख़ुद बेदर्द हो

क्या जानोगे दुसरे के दर्द

पर याद रखना

परमात्मा के दरबार में

तुम्हें तुम्हारे हर कर्म का जवाब देना होगा

हर कर्म का जवाब देना होगा

-----------------

शहीदों को श्रद्धांजलि

-- महेश कुमार वर्मा

Sunday, August 17, 2008

दिल का जख्म


कोई आए मेरे दिल का दर्द सुन ले
कोई तो दिल के जख्म पर मलहम लगा दे

है जख्म ये जो भरती नहीं
है इसकी दवा जो मिलती नहीं
कोई आए मेरे दिल का दर्द सुन ले
कोई तो दिल के जख्म पर मलहम लगा दे


क्या सुनाऊं दिल का हाल
पापियों ने किया इसे बेहाल
थी अरमां आसमां छूने को
पर ऊँचाई से उसने ऐसा धकेला
कि दिल टुकड़े-टुकड़े हुए
दिल टुकड़े-टुकड़े हुए
किसी तरह टुकड़े को जोड़कर
नया जीवन जीना चाहा
पर आगे के राह में
उसने ऐसा रोड़ा लगाया
कि दिल का जख्म बढ़ता ही गया
दिल का दर्द बढ़ता ही गया
कोई आए मेरे दिल का दर्द सुन ले
कोई तो दिल के जख्म पर मलहम लगा दे


बहुत कोशिश की दिल के जख्म को भरने की
पर नहीं किया था रत्ती भर भी सद्व्यवहार उसने
किया था मेरे दिल पर आघात ही आघात उसने
मेरे दिल का जख्म बढ़ता ही गया
दिल का जख्म बढ़ता ही गया
मुझसे उसने दुनियाँ का सब कुछ छीन लिया
नहीं छोड़ा उसने कुछ भी मेरे लिए
सिवाय दिल के जख्म के
सिवाय दिल के जख्म के
कोई आए मेरे दिल का दर्द सुन ले
कोई तो दिल के जख्म पर मलहम लगा दे

कोई तो दिल के जख्म पर मलहम लगा दे
कोई तो दिल के जख्म पर मलहम लगा दे

-----------------
http://kathavyatha.blogspot.com/#septkavita1


Sunday, December 9, 2007

जमाना हो गया है बेदर्द

दिले दर्द को बयां कर नहीं सकता
दर्द को सह पाना आसान नहीं है
आसानी से मर नहीं सकता
ऐसी स्थिति में जिंदा रहना भी आसान नहीं है
सुनाऊं किसे मैं अपना दर्द
जमाना हो गया है बेदर्द
जो सुनना चाहा मेरा दर्द
जमाना उसे मुझसे दूर किया
जमाना उसे मुझसे दूर किया
क्योंकि जमाना हो गया है बेदर्द

Friday, November 30, 2007

तुमसे जुदाई का दर्द सहा नहीं जाता

तुमसे जुदाई का दर्द सहा नहीं जाता
तेरे बिना अब रहा नहीं जाता
खाई थी जीवन भर साथ देने की क़समें
खाई थी साथ-साथ जीने-मरने की क़समें
पर बेदर्द जमाना ने ऐसी जुदाई दी
कि फिर पास आना मुश्किल है
तुमसे मिलना मुश्किल है
आपस में बातें करना मुश्किल है
पर तोड़ दो इन सारे बंधनों को
और पास आ जाओ पास आ जाओ
तुमसे जुदाई का दर्द सहा नहीं जाता
तेरे बिना अब रहा नहीं जाता
चिट्ठाजगत
चिट्ठाजगत www.blogvani.com Hindi Blogs. Com - हिन्दी चिट्ठों की जीवनधारा

यहाँ आप हिन्दी में लिख सकते हैं :