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Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015

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Saturday, February 27, 2010

होली प्रेम पूर्वक मनाएं

सबों को होली की शुभकामनाएं
होली आपसी प्रेम भाईचारा का प्रेम हैअतः यह ख्याल रखें कि इस पर्व में आपसी प्रेम बनाएं रखें तथा किसी के भी साथ जोर-जबरदस्ती नहीं करेंजो चाहे उसे जबरन रंग-गुलाल लगायेंकिसी के साथ अभद्र व्यवहार करें तथा होली को प्रेम के साथ ही मनाएं

-- महेश कुमार वर्मा

Friday, February 26, 2010

महिला आरक्षण क्यों?

सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पास कर दिया है और अब इसपर बहस होगी। इस विधेयक में लोक सभा व राज्य विधान सभा में महिलाओं को 33% आरक्षण की व्यवस्था है। स्थानीय निकाय के चुनाव में पहले से ही महिलाओं को आरक्षण मिला हुआ है। पर वहाँ महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर चुने गए महिला प्रतिनिधि किस प्रकार कार्य कर रही है इस बात को मैं अपने पोस्ट आरक्षण नीति : उचित या अनुचित में बताया हूँ। मेरे इस पोस्ट से आप जान गए होंगे कि आरक्षण के कारण किस प्रकार अयोग्य को भी मजबूरन अपना प्रतिनिधि के रूप में चुनना पड़ता है। व फिर उस चुने हुए प्रतिनिधि अपने अयोग्यता के कारण खुद कार्य नहीं करते हैं और उनके बदले में कार्य कोई और करता है। और जब ऐसा होता है तो फिर उस आरक्षण का क्या मतलब रहा? यह एक विचारनीय प्रश्न है कि क्या आरक्षण उचित है? कोई किसी कार्य के लिए कमजोर है तो उसे ऊँचा उठाना चाहिए ताकि वह उस खास कार्य के लिए योग्य बन सके और इस प्रकार उसे बिना दिक्कत उस खास कार्य को करने का अधिकार प्राप्त हो सकता है और तब वह अपने कार्य को सही ढंग से कर भी सकेगा? जिस प्रकार पेड़ की डाली को चूमने के लिए हमें ऊँचा उठना होगा, पेड़ की डाली नीचे नहीं आ सकती है। उसी प्रकार कमजोर को ऊँचा उठाएं न कि आरक्षण के माध्यम से अयोग्य को जिम्मेवारी सौंपे।
जहां तक महिला आरक्षण विधेयक का सवाल है मैं महिलाओं का सम्मान करता हूँ पर लोक सभा, विधान सभा या स्थानीय निकाय के चुनाव में किसी भी प्रकार से धर्म, जाति या लिंग के आधार पर आरक्षण का मैं जोरदार विरोध करता हूँ।
मैं किसी भी प्रकार से कमजोर वर्ग को चाहे वह पुरुष हो या महिला स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि वे अपने में प्रगति करें व योग्य बनें तब फिर उनके दावेदारी पर लोग खुद उन्हें किसी भी विशेष कार्य की जिम्मेवारी सौंपेंगे। सरकार से मैं कहना चाहता हूँ कि कमजोर को ऊँचा उठाने के लिए सार्थक कदम उठाएं।
-- महेश कुमार वर्मा
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Saturday, February 13, 2010

RSBY के स्मार्ट कार्ड बनाने में अनियमितता

अपने पिछले पोस्ट में मैं बताया कि बिहार में पारिवारिक सर्वेक्षण के आंकड़ा में किस-किस तरह के गलती भरे पड़े हैं। और सच्चाई का खुलासा करते हुए आज मैं बता रहा हूँ कि BPL परिवार के लिए RSBY के स्मार्ट कार्ड बनाने में तथा उसे वितरित करने में किस तरह के अनियमितता बरती गयी है।
इसे बताने से पहले मैं बता दूँ कि स्मार्ट कार्ड बनने के बाद उसे activate करने का अधिकार FKO (हिंदी में शायद ग्राम-सचिव या पंचायत सचिव कहते हैं) को है। कार्ड activation करने की प्रक्रिया है कि FKO का अंगूठा का निशान एक खास स्कैनर से ले लिया जायेगा। फिर हरेक कार्ड को activate करने के लिए कार्ड को card reader में डालकर FKO स्कैनर पर अपना अंगूठा रखेगा। कंप्यूटर पूर्व में दिए गए अंगूठा के निशान से इस अंगूठा को मिलाएगा। यदि अंगूठा सही पाया गया तब तो आगे वह कार्ड activate होगा अन्यथा वह card activate नहीं होगा। हरेक कार्ड को activate करने के लिए बारी-बारी से कार्ड को card reader में डालकर अंगूठा का निशान स्कैनर पर देना पड़ता है जिसे कंप्यूटर पूर्व में दिए गए निशान से मिलाता है।
पर इस प्रक्रिया में अनियमितता यह बरती जा रही है कि FKO के अंगूठा के निशान के बदले कंप्यूटर ओपेरटर के ही अंगूठा के निशान save कर लिया जाता है और फिर ओपेरटर के अंगूठा के निशान से ही कार्ड activate होता है। देखने सुनने में तो यह सामान्य अनियमितता है पर वास्तव में यह बहुत ही गंभीर है। इस प्रकार से की गयी काम की जांच करने पर आप पायेंगे कि कई पंचायत के FKO के अंगूठा के निशान एक ही है और एक ही पंचायत में एक से अधिक भी अंगूठा का निशान है। जो कि सैधांतिक रूप से सही नहीं है क्योंकि विज्ञान के अनुसार किसी भी दो व्यक्ति के एक से अधिक अंगूठा का निशान नहीं हो सकता है और एक स्थान पर दो FKO भी नहीं है। सरकार को या किसी को भी इस अनियमितता की जांच करना हो तो वह activated card का backup file का data को लेकर उसके अंगूठा के निशान (जिससे वह card activate हुआ है) से वहाँ के FKO के अंगूठा के निशान से मिलाकर देखें कि क्या दोनों एक ही है? आप पायेंगे कि दोनों अलग-अलग है। इससे इस प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है क्योंकि विज्ञान के अनुसार किसी भी दो व्यक्ति के अंगूठा के निशान एक ही नहीं हो सकता है।
मैं आपको यह भी बता दूँ कि मैं जो कार्य किया वहाँ मेरे अंगूठा के निशान से भी कई हजार card activate हुए। वैसे पहली बार जब मेरा अंगूठा का निशान लिया गया उससे पहले तक मैं यह नहीं जान पाया था कि FKO के बदले में यह मेरा या अन्य ओपेरटर के अंगूठा का निशान लिया जाता है। मैं समझता था कि उस ओपेरटर को ही card activate करने का अधिकार मिलता है। खैर अचानक उस दिन मेरे पास इस प्रकार का कार्य आने पर उस दिन तो मैं कार्य कर अपने अंगूठा के निशान से card activation का कार्य कर लिया। उससे पहले मैं card activation का नहीं बल्कि card printing का कार्य करता था। इस प्रकार पहला दिन तो अचानक आए इस कार्य को मैं कर दिया। पर चूँकि यह सही कार्य नहीं था तथा मैं कभी भी गलत कार्य करने के पक्ष में नहीं रहा अतः आगे मैं यह कार्य करूँ या इसे करने से इंकार कर दूँ, इसपर मैं खूब विचारा अपने किसी नजदीकी से भी सलाह लिया। अंत में मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि यदि अभी मैं यह कार्य करने से इंकार कर दूंगा तो ये मुझे कार्य पर से निकाल देंगे और फिर मेरे पास इस अनियमितता का कोई सबूत या प्रमाण भी नहीं रहेगा। और यदि मैं अभी यह कार्य कर लूँ तो फिर मुझे इस अनियमितता को साबित करने का प्रमाण मिल जाएगा। काफी सोच-विचार कर मैं वह card activation का कार्य जारी रखने का विचार किया और साथ ही साथ मैंने यह भी फैसला किया कि भविष्य में मैं इस अनियमितता को उजागर करूँगा। और आज अपने इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से मैं इस अनियमितता को सबों के सामने उजागर कर रहा हूँ। सरकार को या किसी भी जांच एजेंसी को इसकी जांच करनी हो तो वे करें। मैं इस अनियमितता का प्रमाण दूंगा, पर मेरी सुरक्षा वे सुनिश्चित करें। मेरे अंगूठा के निशान से कई हजार card activate किये गए हैं जो यह साबित करता है कि card activation FKO नहीं किया है क्योंकि विज्ञान के अनुसार दो भिन्न व्यक्ति के अंगूठा के निशान एक ही नहीं हो सकता है। card किस निशान से activate हुआ यह देखने के लिए आप activated card का backup file देख सकते हैं। मेरे अंगूठा के निशान से किस-किस पंचायत का कार्य activate हुआ मैं आपको बता सकता हूँ। मेरे इस तर्क से यदि आप सहमत नहीं हैं और यदि आपका कहना है कि अनियमितता नहीं हुई है और card FKO द्वारा ही activate किया गया है तो मैं पूछना चाहूँगा कि activated card का backup file से स्पष्ट है कि card मेरे ही अंगूठा के निशान से activate हुआ है तो आप बताएं कि मुझे कब FKO का कार्य सौंपा गया?
अंत में मैं यह भी बता दूँ कि card बनने के बाद card बांटा तो गया पर जब पूरा card नहीं बंट सका और कितने card बचे रह गए तो वहाँ भी register में card प्राप्त करने वाले के अंगूठा के निशान वाले column में भी किसी ओपेरटर से ही अंगूठा का निशान लगा कर card को वितरित दिखा दिया गया। (यह कार्य मैं नहीं किया। मुझे भी card receiving वाले column में अंगूठा का निशान लगाने के लिए कहा गया था पर मैं यह कार्य करने से सीधा इंकार कर दिया था। फिर मुझपर दबाव नहीं डाला गया था।) इसकी जांच भी आप उस register को देखकर कर सकते हैं जहां आप देखेंगे कि एक ही गाँव या पंचायत के कई card एक ही अंगूठा के निशान द्वारा प्राप्त किया गया है।
मेरे द्वारा इस अनियमितता का खुलासा करने से किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
-- महेश कुमार वर्मा 
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Date : 13.06.2012
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जानकारी को बढ़ाते हुए मैं यहाँ स्पष्ट करना  चाहूँगा कि Bikram  block के Habispur  Gona पंचायत के 660, Patut  पंचायत के 792, Dattiyana पंचायत के 651, Arap पंचायत के 515 व Bikram Koraitha पंचायत के 474 (कुल 3092) card मेरे अंगूठे के निशान से activate हुए हैं। 

-- महेश कुमार वर्मा 
 

Friday, February 12, 2010

BPL परिवार के रिकॉर्ड में गलत आंकड़ा

अपने पिछले पोस्ट में मैं इस बात को स्पष्ट करने की कोशिश की है कि किस प्रकार चुनाव आयोग का मतदाता सूचि व फोटो पहचान पत्र के कार्य में गड़बड़ी होती है और सरकार द्वारा पानी के तरह पैसे खर्च किये जाने के बावजूद भी सही ढंग से कार्य नहीं होता है और गलती में सुधार नहीं होती है। आज मैं सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए कराये गए सर्वेक्षण व इसके लिए बनाये जा रहे BPL परिवार के स्मार्ट कार्ड के कार्य को बताने जा रहा हूँ।
बिहार में BPL परिवार के लिए जो सर्वेक्षण किया गया है यदि उस सर्वेक्षण के नतीजे को सही मानें तो आप पायेंगे कि :
  • दो-तीन माह के बच्चा या एक-दो वर्ष के बच्चा भी मजदूरी करता है।
  • किसी के पत्नी के लिंग पुरुष भी है तो किसी के पति के लिंग स्त्री भी है। उसी तरह किसी के पुत्र का लिंग स्त्री व पुत्री का लिंग पुरुष भी है।
  • यह भी मिलेगा कि किसी के एक से अधिक पिता हैं।
  • पिता का उम्र कम व पुत्र का उम्र अधिक भी मिलेगा।
  • किसी व्यक्ति के नाम कई परिवार के सूचि में दर्ज है।
यह सब बात मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि यह बिहार में हुए सर्वेक्षण का नतीजा है और इसी के आधार पर BPL परिवार का रिकॉर्ड तैयार किया गया है व BPL कार्ड (स्मार्ट कार्ड) जारी किया गया है। ऐसे एक-दो उदहारण नहीं हैं बल्कि कई व कई परिवार के साथ मिलेंगे। इतना ही नहीं BPL परिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) का जो समार्ट कार्ड वितरित किया गया है उसमें आपको कई कार्ड ऐसे मिलेंगे कि उसमें हिंदी में नाम कुछ और है तथा इंग्लिश में नाम कुछ और है।
मेरा नाम तो BPL परिवार में नहीं है और न ही मुझे RSBY का स्मार्ट कार्ड ही मिला है पर फिर भी मुझे यह बात इसीलिए मालूम है क्योंकि पारिवारिक सर्वेक्षण के रिपोर्ट को कंप्यूटर में एंट्री करने व RSBY का स्मार्ट कार्ड बनाने का कार्य मैं भी किया हूँ। सरकार को अपने कार्य में इन सब खामियों पर ध्यान देना चाहिए तथा सर्वेक्षण के कार्य में वैसे ही व्यक्ति को भेजना चाहिए जो जानकार हो। अन्यथा यही होगा कि पुत्र का लिंग स्त्री व पुत्री का लिंग पुरुष ही दर्ज होगा। अब आप सोचें कि इस रिकॉर्ड के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्यक्रम में डॉक्टर उसका क्या ईलाज करेगा? क्या डॉक्टर लिंग परिवर्तित देखकर उसे गलत व्यक्ति घोषित कर ईलाज करने से इंकार कर देगा? .............
आपको ऐसे कितने परिवार मिलेंगे जिनको वास्तव में BPL के लिस्ट में नहीं आना चाहिए पर उनका नाम BPL के लिस्ट में है और वे उसका लाभ ले रहे हैं। ..............
जो भी हो पर इस तरह से कार्य होगी तो ये सब गलती में सुधार कभी नहीं होगी क्योंकि सरकार का सभी कार्य ठेका पर ही रहता है। सर्वेक्षण का कार्य भी किसी अन्य कंपनी को दिया जाता है और फिर वह जैसे-तैसे कार्य को सम्पन्न कर सिर्फ अपना ही पैसा बनाते हैं।

--महेश कुमार वर्मा

Thursday, February 11, 2010

सच्चाई का खुलासा : मतदाता सूचि में सुधार नहीं होगा

चुनाव आयोग मतदाता सूचि मतदाता पहचान पत्र बनाने में काफी पैसे खर्च कर रही हैपर मतदाता सूचि मतदाता पहचान पत्र में गलत आंकड़ा में कमी नहीं हो रही हैऔर जगह की बात तो मैं नहीं कह सकता पर बिहार में तो स्थिति यही हैयहाँ के मतदाता सूचि मतदाता पहचान पत्र मतदाता में अंकित मतदाता या संबंधी के नाम में गलती रहना आम बात हो गयी हैमतदाता पहचान पत्र में तो आप यह भी देखेंगे कि मतदाता कोई और है और फोटो किसी और का है, मतदाता पुरुष है तो फोटो किसी महिला का है, इत्यादिबिहार में मतदाता पहचानपत्र बनने की शुरुआत कई वर्ष पहले ही हुईपर प्रारंभ से अब तक मतदाता सूचि में मतदाता के नाम वगैरह में सुधार सही ढंग से नहीं हो पाया हैऔर जिस ढंग से कार्य होती है उसी ढंग से कार्य हो तो शायद कभी सुधार होगी भी नहींक्यों? क्या आपने कभी इस विषय पर सोचा कि आखिर यह सुधार क्यों नहीं हो पाती है जबकि चुनाव आयोग इसपर काफी रकम खर्च कर रही है? बिहार में रहने वाले तो इस बात को जरुर जान रहे होंगे कि मतदाता सूचि मतदाता पहचान पत्र में कितनी गलतियाँ रहती हैइस गलती के कारण एक बार चुनाव में चुनाव आयोग को समाचार पत्र में विज्ञप्ति निकालना पड़ा था कि मतदाता पहचान पत्र में हुई गलती को नजरअंदाज करके मतदाता को वोट डालने दिया जाएभले ही मतदाता उस पहचान पत्र से वोट तो डाल देते हैं पर उस पहचान पत्र में हुई गलती के कारण उसे वे अन्य जगह उपयोग नहीं कर पाते हैंकरते भी हैं तो कहीं-कहीं तो काम हो जाता है परकहीं-कहीं नाम में गलती रहने के कारण उसे अस्वीकार कर दिया जाता हैअब आप ही बताएं कि चुनाव आयोगद्वारा जारी किया गया मतदाता पहचान पत्र में गलती हो और उस गलती के कारण उसका उपयोग अन्य जगह नहीं हो, उसे अस्वीकार कर दिया जाये तो फिर उस पहचान पत्र का क्या मतलब रह गया? ऐसा भी देखने में मिला है किकिसी मतदाता सूचि में एक ही परिवार के सभी सदस्यों के नाम दो बार दर्ज है पर हरेक बार सुधार के कार्य होने के बाद भी वह उसी तरह रहता हैप्रश्न उठता है कि सुधार कार्य में इतने रकम खर्च करने के बाद भी आखिर सुधार क्यों नहीं हो पाता है?
चूँकि मतदाता सूचि मतदाता पहचान पत्र का कार्य मैं भी किया हूँ अतः मुझे उपरोक्त प्रश्न का सही जवाब मालुम हैऔर आज मैं यह खुलासा कर रहा हूँ कि किस प्रकार मतदाता सूचि मतदाता पहचान पत्र का कार्य होता है जिस कारण सुधार नहीं हो पाता है और सरकार का सभी पैसा पानी के तरह बह जाता है
चुनाव आयोग मतदाता सूचि मतदाता पहचान पत्र बनाने का कार्य ठेका पर (Contract basis पर) किसी प्राइवेटकंपनी को दे देती हैबिहार का कार्य सामान्यतः कोलकाता के किसी कंपनी को दिया जाता हैऔर फिर वह कंपनी पटना में विभिन्न स्थानों पर पटना से बाहर भी खुद या किसी अन्य को contract basis पर कार्य देकर कार्य कराती हैकार्य करने के लिए वे local (स्थानीय) ओपेरटर रखते हैंपर ओपेरटर को वे कार्य का पूरा बोझ दिए रहते हैवे ओपेरटर को टार्गेट दे देते हैं कि इतना कार्य करना हैऔर फिर इस स्थिति में ओपेरटर क्या करेगा? वे सुधार कार्य में समय बिताना छोड़कर आगे बढ़ जाते हैंऔर इस प्रकार गलती, जहाँ सुधार करनी थी वह ज्यों का त्यों बना ही रहता हैआप कहेंगे कि ओपेरटर को तो इस प्रकार नहीं करना चाहिएक्यों? आपका कहना तो ठीक हो सकता है पर मैं यहाँ यह भी बता दूँ कि ओपेरटर पर कार्य का काफी दबाव बना रहता है कि इतना कार्य करके इस टार्गेट को पूरा करना ही हैकितने जगह तो ओपेरटर को यह भी निर्देश दे दिया जाता है कि सुधार करने में समय मत बिताओ बल्कि कंप्यूटर पर सिर्फ वह डाटा खोलकर आगे बढ़ जाओ वह डाटा सुधार किया हुआ डाटा में गिनती कर लिया जायेगाऔर ओपेरटर यही करते है तथा गलती में वास्तविक सुधार नहीं होता है जबकि सिस्टम में उसे सुधार किया गया डाटा में गिन लिया जाता हैआपको मैं यह भी बता दूँ कि कोलकाता के एक कंपनी Netware Computer Services ने मुझे इसीलिए काम पर से हटा दिया था क्योंकि गलती को बिना सुधारे आगे बढ़ने के उसके बात को मेरे द्वारा नहीं मानने के कारण मैं उसका टार्गेट पूरा नहीं कर पाता था। .............
किसी भी व्यक्ति को मेरे इस सच्चाई का खुलासा करने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिएपर सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और यों ही पानी के तरह पैसा नहीं बहाना चाहिएबल्कि कार्य में कहाँ त्रुटी है उसे खोजकर उसमें सुधार करना चाहिए।

-- महेश कुमार वर्मा

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