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Justice For Mahesh Kumar Verma

Justice For Mahesh Kumar Verma--------------------------------------------Alamgang PS Case No....

Posted by Justice For Mahesh Kumar Verma on Thursday, 27 August 2015
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Friday, February 12, 2010

BPL परिवार के रिकॉर्ड में गलत आंकड़ा

अपने पिछले पोस्ट में मैं इस बात को स्पष्ट करने की कोशिश की है कि किस प्रकार चुनाव आयोग का मतदाता सूचि व फोटो पहचान पत्र के कार्य में गड़बड़ी होती है और सरकार द्वारा पानी के तरह पैसे खर्च किये जाने के बावजूद भी सही ढंग से कार्य नहीं होता है और गलती में सुधार नहीं होती है। आज मैं सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए कराये गए सर्वेक्षण व इसके लिए बनाये जा रहे BPL परिवार के स्मार्ट कार्ड के कार्य को बताने जा रहा हूँ।
बिहार में BPL परिवार के लिए जो सर्वेक्षण किया गया है यदि उस सर्वेक्षण के नतीजे को सही मानें तो आप पायेंगे कि :
  • दो-तीन माह के बच्चा या एक-दो वर्ष के बच्चा भी मजदूरी करता है।
  • किसी के पत्नी के लिंग पुरुष भी है तो किसी के पति के लिंग स्त्री भी है। उसी तरह किसी के पुत्र का लिंग स्त्री व पुत्री का लिंग पुरुष भी है।
  • यह भी मिलेगा कि किसी के एक से अधिक पिता हैं।
  • पिता का उम्र कम व पुत्र का उम्र अधिक भी मिलेगा।
  • किसी व्यक्ति के नाम कई परिवार के सूचि में दर्ज है।
यह सब बात मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि यह बिहार में हुए सर्वेक्षण का नतीजा है और इसी के आधार पर BPL परिवार का रिकॉर्ड तैयार किया गया है व BPL कार्ड (स्मार्ट कार्ड) जारी किया गया है। ऐसे एक-दो उदहारण नहीं हैं बल्कि कई व कई परिवार के साथ मिलेंगे। इतना ही नहीं BPL परिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) का जो समार्ट कार्ड वितरित किया गया है उसमें आपको कई कार्ड ऐसे मिलेंगे कि उसमें हिंदी में नाम कुछ और है तथा इंग्लिश में नाम कुछ और है।
मेरा नाम तो BPL परिवार में नहीं है और न ही मुझे RSBY का स्मार्ट कार्ड ही मिला है पर फिर भी मुझे यह बात इसीलिए मालूम है क्योंकि पारिवारिक सर्वेक्षण के रिपोर्ट को कंप्यूटर में एंट्री करने व RSBY का स्मार्ट कार्ड बनाने का कार्य मैं भी किया हूँ। सरकार को अपने कार्य में इन सब खामियों पर ध्यान देना चाहिए तथा सर्वेक्षण के कार्य में वैसे ही व्यक्ति को भेजना चाहिए जो जानकार हो। अन्यथा यही होगा कि पुत्र का लिंग स्त्री व पुत्री का लिंग पुरुष ही दर्ज होगा। अब आप सोचें कि इस रिकॉर्ड के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्यक्रम में डॉक्टर उसका क्या ईलाज करेगा? क्या डॉक्टर लिंग परिवर्तित देखकर उसे गलत व्यक्ति घोषित कर ईलाज करने से इंकार कर देगा? .............
आपको ऐसे कितने परिवार मिलेंगे जिनको वास्तव में BPL के लिस्ट में नहीं आना चाहिए पर उनका नाम BPL के लिस्ट में है और वे उसका लाभ ले रहे हैं। ..............
जो भी हो पर इस तरह से कार्य होगी तो ये सब गलती में सुधार कभी नहीं होगी क्योंकि सरकार का सभी कार्य ठेका पर ही रहता है। सर्वेक्षण का कार्य भी किसी अन्य कंपनी को दिया जाता है और फिर वह जैसे-तैसे कार्य को सम्पन्न कर सिर्फ अपना ही पैसा बनाते हैं।

--महेश कुमार वर्मा

Thursday, February 11, 2010

सच्चाई का खुलासा : मतदाता सूचि में सुधार नहीं होगा

चुनाव आयोग मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र बनाने में काफी पैसे खर्च कर रही है। पर मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र में गलत आंकड़ा में कमी नहीं हो रही है। और जगह की बात तो मैं नहीं कह सकता पर बिहार में तो स्थिति यही है। यहाँ के मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र मतदाता में अंकित मतदाता या संबंधी के नाम में गलती रहना आम बात हो गयी है। मतदाता पहचान पत्र में तो आप यह भी देखेंगे कि मतदाता कोई और है और फोटो किसी और का है, मतदाता पुरुष है तो फोटो किसी महिला का है, इत्यादि। बिहार में मतदाता पहचानपत्र बनने की शुरुआत कई वर्ष पहले ही हुई। पर प्रारंभ से अब तक मतदाता सूचि में मतदाता के नाम वगैरह में सुधार सही ढंग से नहीं हो पाया है। और जिस ढंग से कार्य होती है उसी ढंग से कार्य हो तो शायद कभी सुधार होगी भी नहीं। क्यों? क्या आपने कभी इस विषय पर सोचा कि आखिर यह सुधार क्यों नहीं हो पाती है जबकि चुनाव आयोग इसपर काफी रकम खर्च कर रही है? बिहार में रहने वाले तो इस बात को जरुर जान रहे होंगे कि मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र में कितनी गलतियाँ रहती है। इस गलती के कारण एक बार चुनाव में चुनाव आयोग को समाचार पत्र में विज्ञप्ति निकालना पड़ा था कि मतदाता पहचान पत्र में हुई गलती को नजरअंदाज करके मतदाता को वोट डालने दिया जाए। भले ही मतदाता उस पहचान पत्र से वोट तो डाल देते हैं पर उस पहचान पत्र में हुई गलती के कारण उसे वे अन्य जगह उपयोग नहीं कर पाते हैं। करते भी हैं तो कहीं-कहीं तो काम हो जाता है परकहीं-कहीं नाम में गलती रहने के कारण उसे अस्वीकार कर दिया जाता है। अब आप ही बताएं कि चुनाव आयोगद्वारा जारी किया गया मतदाता पहचान पत्र में गलती हो और उस गलती के कारण उसका उपयोग अन्य जगह नहीं हो, उसे अस्वीकार कर दिया जाये तो फिर उस पहचान पत्र का क्या मतलब रह गया? ऐसा भी देखने में मिला है किकिसी मतदाता सूचि में एक ही परिवार के सभी सदस्यों के नाम दो बार दर्ज है पर हरेक बार सुधार के कार्य होने के बाद भी वह उसी तरह रहता है। प्रश्न उठता है कि सुधार कार्य में इतने रकम खर्च करने के बाद भी आखिर सुधार क्यों नहीं हो पाता है?
चूँकि मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र का कार्य मैं भी किया हूँ अतः मुझे उपरोक्त प्रश्न का सही जवाब मालुम हैऔर आज मैं यह खुलासा कर रहा हूँ कि किस प्रकार मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र का कार्य होता है जिस कारण सुधार नहीं हो पाता है और सरकार का सभी पैसा पानी के तरह बह जाता है।
चुनाव आयोग मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र बनाने का कार्य ठेका पर (Contract basis पर) किसी प्राइवेटकंपनी को दे देती है। बिहार का कार्य सामान्यतः कोलकाता के किसी कंपनी को दिया जाता है। और फिर वह कंपनी पटना में विभिन्न स्थानों पर व पटना से बाहर भी खुद या किसी अन्य को contract basis पर कार्य देकर कार्य कराती है। कार्य करने के लिए वे local (स्थानीय) ओपेरटर रखते हैं। पर ओपेरटर को वे कार्य का पूरा बोझ दिए रहते है। वे ओपेरटर को टार्गेट दे देते हैं कि इतना कार्य करना है। और फिर इस स्थिति में ओपेरटर क्या करेगा? वे सुधार कार्य में समय बिताना छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। और इस प्रकार गलती, जहाँ सुधार करनी थी वह ज्यों का त्यों बना ही रहता है। आप कहेंगे कि ओपेरटर को तो इस प्रकार नहीं करना चाहिए। क्यों? आपका कहना तो ठीक हो सकता है पर मैं यहाँ यह भी बता दूँ कि ओपेरटर पर कार्य का काफी दबाव बना रहता है कि इतना कार्य करके इस टार्गेट को पूरा करना ही है। कितने जगह तो ओपेरटर को यह भी निर्देश दे दिया जाता है कि सुधार करने में समय मत बिताओ बल्कि कंप्यूटर पर सिर्फ वह डाटा खोलकर आगे बढ़ जाओ वह डाटा सुधार किया हुआ डाटा में गिनती कर लिया जायेगा। और ओपेरटर यही करते है तथा गलती में वास्तविक सुधार नहीं होता है जबकि सिस्टम में उसे सुधार किया गया डाटा में गिन लिया जाता है। आपको मैं यह भी बता दूँ कि कोलकाता के एक कंपनी Netware Computer Services ने मुझे इसीलिए काम पर से हटा दिया था क्योंकि गलती को बिना सुधारे आगे बढ़ने के उसके बात को मेरे द्वारा नहीं मानने के कारण मैं उसका टार्गेट पूरा नहीं कर पाता था। .............
किसी भी व्यक्ति को मेरे इस सच्चाई का खुलासा करने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। पर सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और यों ही पानी के तरह पैसा नहीं बहाना चाहिए। बल्कि कार्य में कहाँ त्रुटी है उसे खोजकर उसमें सुधार करना चाहिए।

-- महेश कुमार वर्मा
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